भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक महान व्यक्तियों ने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित किया। उन्हीं महान व्यक्तित्वों में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्हें “जन्मजात देशभक्त” कहना बिल्कुल उचित है, क्योंकि बचपन से ही उनके मन में देश के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण था।
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था। उनके परिवार में देशभक्ति के संस्कार गहराई से जुड़े हुए थे। बचपन से ही उन्होंने ब्रिटिश शासन के प्रति विरोध और भारत की स्वतंत्रता के प्रति अपनी भावना को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया। स्कूल के दिनों में भी उन्होंने कई ऐसे कार्य किए जिनसे उनके स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम का परिचय मिलता है।
युवावस्था में उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई की, लेकिन व्यक्तिगत सफलता से अधिक उन्हें राष्ट्र की सेवा महत्वपूर्ण लगती थी। इसलिए उन्होंने अपने जीवन को समाज और देश के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनका विश्वास था कि एक मजबूत, संगठित और जागरूक समाज ही राष्ट्र को महान बना सकता है।
डॉ. हेडगेवार के विचारों में अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का विशेष महत्व था। उन्होंने युवाओं को देश के प्रति समर्पित होकर काम करने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से समाज में एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को बल मिला।
उनका संपूर्ण जीवन त्याग, समर्पण और देशभक्ति का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत लाभ की चिंता नहीं की, बल्कि हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को एक सच्चे और जन्मजात देशभक्त के रूप में याद किया जाता है।
आज भी उनके विचार और उनका जीवन हमें देशप्रेम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देते हैं। उनका जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक है और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की भावना को मजबूत करता है।
मृत्युंजय कुमार झा
( निवेश बैंकर, और संघ विचारक हैं )



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