Narendra Modi

मात्र ₹20 के वार्षिक प्रीमियम में ₹2 लाख तक का दुर्घटना बीमा कवर देकर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना ने करोड़ों गरीब, असंगठित श्रमिकों और वंचित परिवारों को आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया विश्वास प्रदान किया है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) भारत सरकार की सबसे प्रभावी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिसने बीमा को केवल आर्थिक उत्पाद नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार बनाया है। ‘जन धन से जन सुरक्षा’ के विज़न के तहत यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दुर्घटना की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर सामाजिक समावेशन, आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

“सामाजिक सुरक्षा अब केवल विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। ‘जन धन’ के माध्यम से जिस वित्तीय समावेशन की नींव हमने रखी, ‘जन सुरक्षा’ योजनाएँ उसे एक अटूट सुरक्षा चक्र प्रदान करती हैं।”

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

1. प्रस्तावना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत जैसे विशाल, विविध और विकासशील राष्ट्र में जहाँ कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में जीविकोपार्जन करता है, किसी अनपेक्षित दुर्घटना या पारिवारिक त्रासदी का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। वह पूरे परिवार को सामाजिक और आर्थिक तबाही के कगार पर ला खड़ा करता है। दशकों तक भारत की आर्थिक व्यवस्था में बीमा (Insurance) को केवल उच्च या उच्च-मध्यम वर्ग का विशेषाधिकार माना जाता रहा। गरीब, दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, छोटे किसान, रेहड़ी-पटरी वाले और निर्माण श्रमिक वित्तीय अनिश्चितताओं के साये में जीने को मजबूर थे। उनके लिए किसी गंभीर दुर्घटना का अर्थ था—जीवनभर की जमापूंजी का खत्म हो जाना, कर्ज के जाल में फँसना या भुखमरी की नौबत आ जाना।
इस ऐतिहासिक विसंगति और सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए भारत सरकार ने 9 मई 2015 को कोलकाता की ऐतिहासिक धरती से एक क्रांतिकारी सामाजिक सुरक्षा अभियान का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘जन सुरक्षा’ त्रिमूर्ति अभियानों के तहत तीन प्रमुख योजनाएँ शुरू की गईं:

  1. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) — दुर्घटना बीमा कवर।
  2. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) — जीवन बीमा कवर।
  3. अटल पेंशन योजना (APY) — वृद्धवस्था पेंशन सुरक्षा।
    इनमें से PMSBY मुख्य रूप से दुर्घटनाजन्य मृत्यु और विकलांगता कवर (Accidental Death and Disability Cover) प्रदान करने वाली विश्व की सबसे सस्ती और व्यापक योजनाओं में से एक बनकर उभरी। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश के अंतिम छोर पर खड़े नागरिक को मात्र ₹20 प्रति वर्ष के मामूली प्रीमियम पर ₹2 लाख का वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करना है।

2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का विज़न: ‘जन धन से जन सुरक्षा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकास मॉडल “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास” के दर्शन पर आधारित है। उनके विज़न में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) केवल एक बैंक खाता खोलने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इसे एक बहुस्तरीय और समावेशी कल्याणकारी ढाँचे के रूप में तैयार किया गया था:

[प्रथम चरण: खाता खोलना] ➔ [द्वितीय चरण: सुरक्षा देना] ➔ [तृतीय चरण: भविष्य सुरक्षित करना]
(प्रधान मंत्री जन धन योजना) (PMSBY एवं PMJJBY) (अटल पेंशन योजना)

विज़न के मुख्य स्तंभ:

  1. बीमा का लोकतंत्रीकरण (Democratization of Insurance):
    पारंपरिक मॉडल में बीमा पाना अत्यधिक महँगा और जटिल था। मोदी जी का दृष्टिकोण स्पष्ट था कि सुरक्षा पर देश के निर्धनतम नागरिक का भी उतना ही अधिकार है जितना किसी संपन्न व्यक्ति का। PMSBY ने बीमा को “लक्जरी” से हटाकर “बुनियादी हक” बना दिया।
  2. बिचौलियों और जटिलता का उन्मूलन:
    पारंपरिक बीमा योजनाओं में एजेंटों का कमीशन, अत्यधिक कागजी कार्रवाई, और कठिन शर्तें गरीब वर्ग के लिए मुख्य बाधाएँ थीं। प्रधानमंत्री के विज़न ने तकनीक के माध्यम से बैंकों को सीधे लाभार्थी से जोड़ा। “ऑटो-डेबिट” (Auto-Debit) प्रणाली लागू करके प्रक्रिया को पारदर्शी और सहज बनाया गया।
  3. गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ना (Breaking the Poverty Cycle):
    प्रधानमंत्री जी ने बार-बार रेखांकित किया है कि एक गरीब परिवार वर्षों की अथक मेहनत से गरीबी रेखा से ऊपर उठता है, लेकिन परिवार के मुख्य कमाने वाले व्यक्ति के साथ हुई एक दुर्घटना उस परिवार को वापस दरिद्रता में ढकेल देती है। PMSBY इस दुष्चक्र को रोकने के लिए एक मजबूत “इकोनॉमिक शॉक एब्जॉर्बर” (Economic Shock Absorber) का कार्य करती है।

3. योजना का स्वरूप, पात्रता एवं संरचनात्मक विशेषताएँ

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को अत्यंत सरल, सुलभ और जन-उन्मुख बनाया गया है। इसकी मुख्य तकनीकी और कार्यात्मक विशेषताएँ निम्नलिखित तालिका में दर्शित हैं:

मानक / विशेषताविवरण एवं शर्तें
पात्रता (Eligibility)18 से 70 वर्ष की आयु के सभी बचत बैंक या डाकघर खाताधारक।
वार्षिक प्रीमियम (Annual Premium)₹20 प्रति वर्ष (प्रारंभ में यह ₹12 थी, जिसे जून 2022 में संशोधित कर ₹20 किया गया)।
भुगतान विधि (Payment Mode)लाभार्थी के बैंक खाते से प्रतिवर्ष ‘ऑटो-डेबिट’ (Auto-Debit) प्रणाली द्वारा।
कवरेज अवधि (Coverage Period)1 जून से 31 मई तक (प्रतिवर्ष नवीनीकरण योग्य)।
आकस्मिक मृत्यु (Accidental Death)₹2,00,000 (नामांकित व्यक्ति / Nominee को देय)।
पूर्ण स्थायी विकलांगता (Total Disability)दोनों आँखों/हाथों/पावों की पूर्ण क्षति पर ₹2,00,000
आंशिक स्थायी विकलांगता (Partial Disability)एक आँख/हाथ/पाव की क्षति पर ₹1,00,000
कार्यान्वयन एजेंसीसार्वजनिक व निजी क्षेत्र की जनरल इंश्योरेंस कंपनियाँ तथा बैंक।

4. विस्तृत सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण

PMSBY ने केवल आंकड़े नहीं बदले हैं, बल्कि भारत के ग्रामीण और असंगठित परिदृश्य में एक गहरा सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाया है।

(क) द्वितीयक निर्धनता (Secondary Poverty) पर प्रभावी रोक

असंगठित क्षेत्र के श्रमिक—जैसे राजमिस्त्री, बिजली मिस्त्री, ड्राइवर, खेतिहर मजदूर और कारखाने के कामगार प्रतिदिन उच्च जोखिम वाले वातावरण में कार्य करते हैं। किसी दुर्घटना की स्थिति में, परिवार न केवल आय का साधन खो देता है, बल्कि इलाज और अंतिम संस्कार के खर्च से कर्ज में डूब जाता है। PMSBY के माध्यम से मिलने वाली ₹2 लाख की दावा राशि परिवार को अचानक आए वित्तीय संकट से उबारती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई नहीं छूटती और परिवार को अपनी संपत्ति या मवेशी नहीं बेचने पड़ते।

(ख) असंगठित कार्यबल का सशक्तिकरण और श्रम की गरिमा

भारत का लगभग 85-90% कार्यबल असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। अतीत में, इन श्रमिकों के पास न तो कोई सामाजिक सुरक्षा थी और न ही किसी त्रासदी के समय कोई संस्थागत सहायता। PMSBY ने इस विशाल वर्ग को औपचारिक वित्तीय सुरक्षा तंत्र से जोड़कर उन्हें आत्मसम्मान और सुरक्षा का अहसास कराया है।

(ग) महिला सशक्तिकरण और लैंगिक सुरक्षा

इस योजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक पक्ष महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा है।

  • नामांकित व्यक्ति (Nominees) के रूप में: PMSBY के अंतर्गत दाखिल अधिकांश दावों में मृतक श्रमिकों की पत्नियाँ या माताएँ नामांकित (Nominees) होती हैं। दुर्घटना के बाद सीधे उनके बैंक खाते में क्लेम की राशि हस्तांतरित होने से उन्हें बिचौलियों के शोषण से मुक्ति मिलती है और जीवनयापन का सहारा मिलता है।
  • महिला लाभार्थियों की भागीदारी: महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और आजीविका मिशनों के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण महिलाओं ने स्वयं भी इस योजना में पंजीकरण कराया है, जिससे उनकी सामाजिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

(घ) बैंकिंग संस्कृति और वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) का विकास

PMSBY का लाभ उठाने के लिए बैंक खाता होना अनिवार्य शर्त है। प्रतिवर्ष मई महीने में जब खाते से ₹20 की राशि कटती है, तो नागरिक में अपने बैंक खाते को सक्रिय (Active) रखने की जागरूकता पैदा होती है। इसने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग संस्कृति को बढ़ावा दिया है और लोगों को साहूकारों के चंगुल से निकालकर औपचारिक वित्तीय संस्थाओं की ओर मोड़ा है।

5. वास्तविक परिदृश्य: केस स्टडी (Case Studies)

योजना के वास्तविक प्रभाव को कुछ व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझा जा सकता है:

केस स्टडी 1: उत्तर प्रदेश के निर्माण श्रमिक का परिवार
उत्तर प्रदेश के एक छोटे गाँव के निवासी रामदीन (बदला हुआ नाम) दिहाड़ी मजदूरी करते थे। उन्होंने अपने जन धन खाते के माध्यम से PMSBY में ₹20 का वार्षिक ऑटो-डेबिट चालू कराया था। एक अनहोनी दुर्घटना में काम के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनके निधन के बाद, स्थानीय बैंक शाखा की मदद से उनकी पत्नी को मात्र 20 दिनों के भीतर ₹2,00,000 का दावा भुगतान मिला। इस राशि ने न केवल उनके दो बच्चों की स्कूली शिक्षा को जारी रखा, बल्कि उनकी पत्नी को एक छोटा किराना स्टोर शुरू करने का संबल भी दिया।

केस स्टडी 2: राजस्थान के ऑटो चालक की स्थायी विकलांगता
राजस्थान में ऑटो चलाने वाले कन्हैयालाल एक सड़क दुर्घटना में अपना एक हाथ गँवा बैठे। शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण उनका आजीविका का साधन बंद हो गया। PMSBY के तहत आंशिक/स्थायी विकलांगता के दावे के रूप में उन्हें ₹1,00,000 की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने अपने इलाज का खर्च उठाया और बाद में एक छोटी दुकान खोलकर पुनः स्वावलंबी बने।

6. JAM त्रिमूर्ति और डिजिटल इंडिया का रणनीतिक एकीकरण

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की सफलता का मुख्य स्तंभ JAM (Jan Dhan – Aadhaar – Mobile) त्रिमूर्ति का कुशल तकनीकी उपयोग है:

  1. जन धन (Jan Dhan): इसने देश के प्रत्येक गरीब नागरिक के लिए शून्य-बैलेंस खाता खोलकर बीमा योजना में शामिल होने का आधार तैयार किया।
  2. आधार (Aadhaar): इसने लाभार्थियों की पहचान को सत्यापित कर पारदर्शी बनाया, जिससे फर्जी दावों (Fraud Claims) और लीकेज को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
  3. मोबाइल (Mobile): बैंक खातों से प्रीमियम कटने की सूचना, क्लेम स्टेटस और योजना से संबंधित अपडेट एसएमएस (SMS) के जरिए सीधे लाभार्थी तक पहुँचते हैं।
    इस डिजिटल एकीकरण के कारण पारंपरिक बीमा कंपनियों की तुलना में प्रशासनिक लागत (Administrative Cost) बेहद कम हो गई, जिससे मात्र ₹20 में इतना बड़ा रिस्क कवर देना संभव हो सका।

7. चुनौतियाँ और भावी सुधार के सुझाव

यद्यपि PMSBY ने रिकॉर्ड संख्या में नामांकन हासिल किए हैं, फिर भी योजना की प्रभावशीलता को शत-प्रतिशत करने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में निरंतर सुधार की आवश्यकता है:

  1. दावा प्रक्रिया (Claim Process) का सरलीकरण:
    दुर्घटना मृत्यु के मामलों में पुलिस प्राथमिकी (FIR) और पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) जमा करना अनिवार्य होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर इन दस्तावेजों को प्राप्त करने में औपचारिकताएँ आड़े आती हैं। इसे डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सीधे पुलिस और अस्पताल प्रणाली से जोड़ा जाना चाहिए।
  2. दावा निपटान समय (Claim Settlement Ratio) में तेजी:
    बैंकों और बीमा कंपनियों के बीच तालमेल को और बेहतर बनाकर क्लेम सेटलमेंट की अवधि को अधिकतम 15 दिनों के भीतर सीमित करने की नीति अपनानी होगी।
  3. जागरूकता अभियानों का विस्तार:
    कई ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थी की मृत्यु के बाद उसके नामांकित (Nominee) व्यक्ति को यह जानकारी ही नहीं होती कि मृतक का दुर्घटना बीमा था। इसके लिए ग्राम पंचायतों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और बैंक मित्रों के माध्यम से नियमित जागरूकता शिविर आयोजित किए जाने चाहिए।

8. निष्कर्ष

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) केवल एक बीमा उत्पाद या सरकारी कल्याणकारी घोषणा नहीं है; यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में रचा गया एक व्यापक और मानवीय सुरक्षा चक्र है। इसने भारत में बीमा व्यवस्था के स्वरूप को पूरी तरह बदलकर रख दिया है—इसे लाभ कमाने वाले व्यावसायिक मॉडल से उठाकर ‘सहानुभूतिपूर्ण सामाजिक उत्तरदायित्व’ का रूप प्रदान किया है।
₹20 प्रति वर्ष जैसी नाममात्र लागत (जो दैनिक रूप से एक चाय की कीमत से भी कम है) पर ₹2 लाख का बीमा कवर प्रदान करके इस योजना ने साबित कर दिया है कि यदि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का संयोजन हो, तो समाज के सबसे वंचित व्यक्ति तक भी सरकार की नीतियों का सीधा लाभ पहुँचाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘जन धन से जन सुरक्षा’ का यह विज़न भारत को एक “सुरक्षित, समावेशी, आत्मनिर्भर और कल्याणकारी राष्ट्र” बनाने की दिशा में एक युगांतकारी और स्वर्णिम अध्याय है।


(मृत्युंजय कुमार झा )
इन्वेस्टमेंट बैंकर

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